इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल त्रासदी की न्यायिक जांच रिपोर्ट में नगर निगम अधिकारियों की गंभीर प्रशासनिक लापरवाही उजागर हुई है, जहां नई पाइपलाइन बिछाने की फाइल 100 दिनों तक लंबित रखी गई।
अधिकारियों की टालमटोल और लापरवाही
जांच आयोग द्वारा उच्च न्यायालय में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें दर्ज हो रही थीं। इसके बावजूद नई पेयजल लाइन के प्रस्ताव को महीनों तक स्वीकृति नहीं दी गई। जांच के दौरान अधिकारियों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने का प्रयास किया।

600 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पर 8 सितंबर को सुनवाई
आयोग ने तत्कालीन निगमायुक्तों, अपर आयुक्तों और इंजीनियरों के बयानों को शामिल करते हुए 600 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें 200 पन्नों का विस्तृत निष्कर्ष है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग पर भी विचार किया जाएगा।
