इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण 36 लोगों की असामयिक मृत्यु के मामले में गठित न्यायिक जांच आयोग की विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई है।
नई पाइपलाइन की फाइल 100 दिनों तक दबाए रखने का खुलासा
उच्च न्यायालय में दाखिल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में गंभीर पेयजल संकट और दूषित जलापूर्ति की जानकारी होने के बावजूद नई पाइपलाइन बिछाने से संबंधित महत्वपूर्ण फाइल प्रशासनिक पटल पर 92 से 100 दिनों तक अनावश्यक रूप से रोके रखी गई।
जांच के दौरान तत्कालीन नगर निगम आयुक्तों, अपर आयुक्तों तथा जलकार्य विभाग के कार्यपालन और सहायक यंत्रियों के विस्तृत बयान दर्ज किए गए, जिनमें अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने का प्रयास सामने आया है।
600 पृष्ठों की रिपोर्ट पर 8 सितंबर को होगी महत्वपूर्ण सुनवाई
आयोग द्वारा तैयार 600 पृष्ठों की इस जांच रिपोर्ट में 400 पृष्ठों में अधिकारियों के बयान तथा 200 पृष्ठों में निष्कर्ष व अनुशंसाएं दर्ज हैं। जांच में वर्ष 2019 से लेकर 2025 तक नागरिकों द्वारा की गई शिकायतों और प्रशासनिक उपेक्षा का सिलसिलेवार विवरण शामिल किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की है। मामले की अगली औपचारिक सुनवाई उच्च न्यायालय में 8 सितंबर को निर्धारित है।

