सरकारी दस्तावेजों और डिजिटल पोर्टल की विसंगतियों के चलते गुना जिले में खैरुवा समाज के हजारों परिवारों की जातीय पहचान विचित्र संकट में फंस गई है, जहां एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां तीन अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज हो चुकी हैं।
एक ही परिवार में तीन अलग-अलग वर्ग
जिले के लगभग 18 गांवों में बसे खैरुवा समाज के बुजुर्गों के पास अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रमाण पत्र हैं, उनके पुत्रों को पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमाण पत्र दिया गया, जबकि डिजिटल पोर्टल पर जाति का विकल्प न होने से तीसरी पीढ़ी के बच्चों को सामान्य वर्ग में दर्ज किया जा रहा है। प्रशासनिक नियमों में बार-बार हुए बदलावों से करीब 25 से 30 हजार लोगों के शैक्षणिक और सामाजिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की है। प्रभावित परिवारों से दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है ताकि स्थानीय स्तर पर समाधान निकाला जा सके अथवा शासन स्तर पर नीतिगत निर्णय के लिए प्रस्ताव भेजा जा सके।
“जाति विसंगति के मामलों की जांच के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर उचित निराकरण किया जाएगा।” — किशोर कुमार कन्याल, कलेक्टर गुना

