धार जिले के रिंगनोद में चातुर्मास स्थल पर सुधा संजय पंवार द्वारा मात्र गर्म जल के आधार पर की गई 33 उपवास (मासक्षमण) की कठिन तपस्या की पूर्णता पर भव्य वरघोड़ा निकाला गया।
साध्वी मंडल की निश्रा में हुआ तप अनुमोदन
पूज्य दर्शनकला श्रीजी मसा के आशीर्वाद तथा साध्वी विज्ञानलता श्रीजी मसा, साध्वी राजयशा श्रीजी मसा और साध्वी स्वरलता श्रीजी मसा की पावन निश्रा में यह धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। तपस्वी के सम्मान में आयोजित वरघोड़े में समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भाग लिया और तप की अनुमोदना की।
तप से कर्म बंधनों का होता है क्षय
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी विज्ञानलता श्रीजी मसा ने कहा कि जैन दर्शन में तपस्या का असाधारण महत्व है। तप से आत्मा निर्मल होती है और पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा होती है। उन्होंने कहा कि इंद्रिय संयम और दृढ़ मनोबल से ही ऐसी दुष्कर साधना संभव हो पाती है।

